अगर आपको शिकायत रहती है की आपका बैंक होम लोन की ब्याज दर कम नहीं कर रहा है,
तब आपके लिए अच्छी खबर है|

भारतीय रिज़र्व बैंक ने आदेश दिया है की 1 अक्तूबर 2019 से दिए जाने वाले नए लोन
(new floating rate loan) अब बाहरी बेंचमार्क (external benchmark) से लिंक होंगे| होम लोन
और ऑटो लोन आमतौर पर floating rate लोन होते हैं|

आईये जानते हैं की इस नए नियम से आपको क्या फायदा होगा|

होम लोन की ब्याज दर कैसे कैलकुलेट होती है?

आपके होम लोन की ब्याज दर के दो हिस्से होते हैं|

  1. Benchmark (बेंचमार्क):
    जैसे की Base Rate, MCLR, बेंचमार्क ब्याज
    दर बदलती रहती है|
  2. Spread (स्प्रेड): यह
    आपके रोज़गार, लोन चुकाने की क्षमता, क्रेडिट
    स्कोर इत्यादि पर निर्भर करता है| स्प्रेड आम तुअर पर आपकी लोन की अवधि के दौरान
    एक समान रहता है|

आपकी ब्याज दर होगी Benchmark + Spread

मान लिए अभी benchmark 8% है और आपके
लोन का स्प्रेड 1.5% है, तब आपके लोन की ब्याज दर होगी 9.5% p.a.|

अगर कुछ समय बाद बेंचमार्क बढ़ कर 9% हो जाता है, तब आपके लोन की ब्याज दर बढ़
कर 9%+1.5%=10.5% हो जायेगी|

अगर benchmark घट कर 7% हो
जाता है, तब आपके लोन की ब्याज दर घट कर 7%+1.5% = 8.5% हो जायेगी|

बेंचमार्क की ब्याज दर हर बैंक एक फार्मूला के अनुसार
कैलकुलेट करता है|

इसमें परेशानी क्या है?

यह देखा गया है की बैंक benchmark ब्याज दर को बढ़ा तो जल्दी देते हैं, परन्तु कम आसानी से नहीं करते| इससे लोन उधार्कर्तायों (borrower) को बड़ी परेशानी होती है| उनकी ईएमआई (EMI) बढ़ तो जल्दी जाती है, परन्तु आसानी से कम नहीं होती|

जब इकॉनमी (economy) में ब्याज दर
बढती है, तब आपके लोन की ब्याज दर
जल्दी से बढ़ जाती है|

परन्तु जब इकॉनमी में ब्याज दर कम हो रही होती हैं, तब ब्याज दर जल्दी से कम नहीं होती है|

External Benchmark (बाहरी बेंचमार्क) से क्या फायदा होगा?

बैंक का बाहरी बेंचमार्क पर कोई नियंत्रण नहीं होता|

बैंक रिज़र्व बैंक रेपो रेट या ट्रेज़री बिल यील्ड (treasury bill yield) को external benchmark की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं|

अब क्योंकि बैंक का benchmark ब्याज दर पर
कोई नियंत्रण नहीं है, जब भी बाहरी बेंचमार्क की दर बदलेगी, आपके लोन की ब्याज दर भी बढ़ेगी या घटेगी|

आपके लोन की ब्याज दर कम आसानी से हो जायेगी| बैंक यहाँ कोई चालाकी नहीं कर
पायेगा|

भारतीय स्टेट बैंक ने रेपो रेट लिंक्ड होम लोन (RLLR होम लोन) शुरू भी किया है| इस लोन में रिज़र्व बैंक की रेपो रेट (Repo rate) को benchmark बनाया गया है| इस होम लोन की ब्याज दर पुराने होम लोन से कम है| अधिक जानकारी के लिए आप SBI होम लोन की वेबसाइट पर जा सकते हैं|

मेरे पास पहले से होम लोन है, क्या मैं शिफ्ट कर सकता हूँ?

जी हाँ, अगर आपके पास मौजूदा लोन
है, जो की base rate या MCLR जैसे benchmark से जुड़ा हुआ
है, आप उसे external benchmark वाले लोन में शिफ्ट कर सकते हैं|

मेरे अनुसार इसके लिए आपको कुछ ख़ास फीस भी नहीं देनी होगी|

आप 1 अक्तूबर 2019 के बाद अपने बैंक से संपर्क करें| पता करें की अगर आप लोन
को शिफ्ट करते हैं, तो आपके लोन की नयी ब्याज दर क्या होगी?

अगर नयी ब्याज दर आपकी मौजूदा ब्याज दर से कम है, तो आप शिफ्ट कर सकते हैं| शिफ्ट करने की फीस को भी ध्यान में रखें|

अगर आपका लोन बैंक से नहीं है, तब आपको यह विकल्प नहीं मिलेगा| अगर आपका लोन HDFC, DHFL या LIC Housing Finance से है, तब आपको अभी इस नियम का लाभ नहीं मिलेगा| परन्तु ऐसी स्तिथि में आप अपने लोन को बैंक में ट्रान्सफर करा सकते हैं|

अतिरिक्त जानकारी के लिए पढ़ें

भारतीय रिज़र्व बैंक का सर्कुलर (Reserve Bank Circular)

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