फलमक्खी एक गंभीर समस्या 

फलो तथा सब्जी के खेतो से जब हम अच्छे फसल कि कामना करते है, फलमक्खी के प्रकोप से खासा नुकसान होता है. इसके नियंत्रण के लिये जहरिली दवा का छीडकाव असरदार नही होता. दवा के इस्तेमाल से खर्च बढता है व रेसिड्यू कि समस्या निर्माण होती है. फलमक्खी का नियंत्रण ना किया गया तो ७० से ९० प्रतिशत फलकि सडन होने का डर लगा रहता है.

फलमक्खी कि पैदावार क्षमता इतनी अधिक होती है कि एक फलमक्खी मिलन के बाद, हजारो फलोमे डंख लगाके अंडे दे सकती है. मादा कीट कोमल फलों में छेद करके छिलके के भीतर अंडे देती है. अंडों से इल्लियां निकलती हैं तथा अंदर हि अंदर फलों के गूदे को खाती हैं. इसमे जीवाणू तथा फफुंद लग जाती है, जिससे फल सड़ने लगते हैं। क्षतिग्रस्त फल टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं तथा कमजोर होकर नीचे गिर जाते हैं। इसके बाद इल्लीया जमीन मे प्रवेश कर शंकी बन जाती है. कुछ हि दिनोमे इनसे प्रौढ फल मक्खी निकल आती है.

फलमक्खी कि अनेक प्रजातीया है जो ८१ से जादा फसलोको बरबाद करती है. अगर असरदार नियंत्रण न हो तो इनसे ३० से १०० प्रतिशत नुकसान संभव है. ३२ डिग्री सेल्सिअस के नीचे का तापमान तथा ६० से ७० प्रतिशत बाष्प इस किट के पनपनेमे सहाय्यक होता है. ऐसे वक्त मक्षिकारी का प्रयोग असरदार होता है.

मक्षिकारी कैसे काम करता है?

मक्षिकारी एक कामगंध पाश है जो फल मक्खी के नर – मादा अनुपात को बदल देता है. इससे उच्च दर्जा का तथा लंबी दौर का नियंत्रण संभव होता है. जब आप एक एकड क्षेत्र मे आठ मक्षिकारी पाश लगाते हो, नर फल मक्खी इसके और आकर्षित हो कर मारी जाती है. इसके बाद मादा मक्खी नर कि खोज मे कही और चली जाती है. इस तरह फल मक्खी के डंख से बचजाते है. अगर आप हर ४५ दिन मे मक्षिकारी बदल देते है तो आप फल मक्खी का नियंत्रण कर सकते है.

जब आप मक्षीकारी पहली बार क्षेत्र मे स्थापित करेंगे तब इसके तेज गंध कि लहर से ९९.९९ प्रतिशत नर मक्खीया आकर्षित होकर मारी जाएगी. इससे उत्पन्न होने वाले नर मादा अनुपात परिवर्तनसे दो परिणाम होते है. मिलन के लिये मादाए दुसरे क्षेत्र मे चली जाती है. आपके क्षेत्रमे फलमक्खी कि संख्या कम होनेसे बहरी क्षेत्र से नयी फलमक्खीया आकर्षित होती है. मक्षिकारी से निकलने वाले मध्यम गंध कि लहर इन नयी घूसपैठीयो को भी नियंत्रित कर लेती है. दूरगामी तथा प्रभावी नियंत्रण हेतू ४५ दिन बाद नये ल्युअर स्थापित करे.

माक्षिकारी के स्थापना मे दो स्तर है. पीले कप के छिद्रसे ल्युअर का तार पास करे, ढक्कन लगाके  यह पाश जमीन से लगभग 3 से 5 फीट पर लटका दे. हर 45 दिनों के बाद माक्षिकारीलुअर बदलें। मृत मक्खियों और पुराने लुअर को जला अथवा जमीन मे गाड दे.

प्रयोग निम्न फसलोमे किया जा सकता है

फल:   आम, अमरूद, केला, पपीता, शरीफा , चीकू, बड़े, जामुन,पीच , संतरा, किन्नो, नींबू, जामुन , जैतून , अंगूर , स्टार फल , अनानास, सेब , कटहल , कीवी फल , पॅशन फल

किन्नोमे फलमक्खी से होसकता है भारी नुकसान

फल सब्जियों:  टमाटर, मिर्च, शिमला मिर्च, बैंगन

बेलवाली सब्जियां:    तरबूज, खरबूजालौकीतोरई, पेठा, ककड़ी, खीरा, टिण्डा, करेला , कद्दू कुम्ह्डा, कुंतल, करौदा लौकी मटर

अन्य: बादाम , काजू, कॉफी , अरंडी, बीटल अखरोट , सूरजमुखी, मक्का

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